गुरुवार 2 जुलाई 2026 - 15:10
अगर रहबर ए इंक़ेलाब वार्ता से मना करते तो हम कभी वार्ता नहीं करतेः राष्ट्रपति पिज़िश्कियान

हौज़ा / ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि वार्ता का फ़ैसला राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बहुमत की मंज़ूरी और रहबर-ए-इंक़िलाब के निर्देशों के अनुसार किया गया, और अगर वार्ता न करने का आदेश दिया जाता तो सरकार पूरी तरह से आज्ञा का पालन करती।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिज़ेश्कियान ने कहा है कि सरकार के सभी महत्वपूर्ण फ़ैसले रहबर-ए-इंक़िलाब की नीतियों और व्यवस्था के निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार लिए जाते हैं, और अगर रहबर-ए-इंक़िलाब वार्ता न करने का निर्देश देते तो न कोई बैठक आयोजित होती और न ही कोई वार्ता की जाती।

विवरण के अनुसार, राष्ट्रपति पिज़ेश्कियान ने इस्लामी प्रचार की संपर्क परिषद के 'कार्यक्रम-यादगार' के आयोजकों से मुलाक़ात के दौरान हाल के शहीदों, बारह-रोज़ा संग्राम और अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि हाल की कठिन परिस्थितियों में ईरानी जनता ने साबित कर दिया कि देश की सबसे बड़ी पूँजी जनता है, और अगर जनता का समर्थन, एकजुटता और धैर्य न होता तो दुश्मन अपनी साज़िशों पर अमल करने से बाज़ न आता।

राष्ट्रपति पिज़ेश्कियान ने कहा कि दुश्मन ने ईरान की आंतरिक स्थिति का गलत आकलन किया था। उच्च सैन्य कमांडरों, वरिष्ठ अधिकारियों और रहबर-ए-इंक़िलाब को निशाना बनाने के बाद देश में अशांति और भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी, हालाँकि ईरानी जनता के एकता ने इन सभी योजनाओं को नाकाम कर दिया।

उन्होंने वार्ता के संदर्भ में कहा कि सभी कदम व्यवस्था की स्वीकृत नीतियों और देश की समग्र रणनीति के दायरे में उठाए गए हैं और आज भी इसी रास्ते पर पूर्ण सामंजस्य के साथ प्रगति जारी है।

राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वार्ता के बारे में रहबर-ए-इंक़िलाब ने फ़रमाया था कि अगर राष्ट्रीय सुरक्षा की उच्च परिषद के तीन-चौथाई सदस्य इसके समर्थन में हों तो उसी पर अमल किया जाए। उन्होंने बताया कि 13-सदस्यीय परिषद की बैठक में 12 सदस्यों ने न केवल वार्ता का समर्थन किया, बल्कि विस्तृत चर्चा के बाद इसकी भरपूर ताईद भी की।

राष्ट्रपति पिज़ेश्कियान ने सरकार पर रहबर-ए-इंक़िलाब के निर्देशों के उल्लंघन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर रहबर-ए-इंक़िलाब आदेश देते कि कोई बैठक या वार्ता न हों तो सरकार कदापि ऐसा न करती और पूरी तरह से इस निर्देश पर अमल किया जाता।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश के सामने मौजूद जटिल परिस्थितियों और चुनौतियों से निपटने के लिए व्यवस्था के सभी संस्थानों के बीच एकता, सामंजस्य और आपसी सहयोग अपरिहार्य है, क्योंकि हाल के अनुभवों ने साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय एकजुटता ही ईरान की सबसे बड़ी ताकत है।

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